ब्रेन स्ट्रोक में नजर आते हैं ये लक्षण

डॉ. जन्मेजय जामदार, न्यूरोसर्जन, ब्रेन स्ट्रोक के लक्षणों के बारे में जानकारी देते हुए।
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Dr. Jamdar has served as Senior Resident in Neurosurgery at Sanjay Gandhi Post Graduate Institute of Medical Sciences from 2013 to 2016. He worked as Resident General Surgeon at Netaji Subhash Chandra Bose Medical College and Hospital from 2009 to 2012. He has also practiced as Consultant Neurosurgeon at Jamdar Hospital Pvt. Ltd. and Jabalpur Hospital and Research Centre.
Dr. Jamdar focuses on appropriate diagnosis and condition-based management, offering treatment options suited to the patient’s clinical needs.
Click any service to see what's included, prep, aftercare and more.

डॉ. जन्मेजय जामदार, न्यूरोसर्जन, ब्रेन स्ट्रोक के लक्षणों के बारे में जानकारी देते हुए।

रीढ़ की हड्डी के जिस हिस्से में परेशानी होती है, उसी के अनुसार व्यक्ति में लक्षण नजर आते हैं। अगर व्यक्ति के गर्दन में कोई समस्या होती है तो उसे हाथ, गर्दन एवं सिर के पिछले हिस्से में दर्द का एहसास हो सकता है। रीढ़ की हड्डी में दबाव पड़ने से पैर लड़खड़ा सकते हैं या व्यक्ति को चलने में तकलीफ हो सकती है। वहीं अगर पीठ में कोई समस्या आ जाये, तो इसका असर पसलियों पर पड़ता है। अगर कोई नस दब जाये तो व्यक्ति को चलने में परेशानी होने लगती है। यदि, कमर में कोई परेशानी उत्पन्न हो जाये तो पैरों में झुनझुनाहट एवं सुन्नपन जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं। इसके साथ ही व्यक्ति के मल और पेशाब में भी तकलीफ बढ़ जाती है। डॉ. जन्मेजय जामदार, न्यूरोसर्जन, रीढ़ की हड्डी में परेशानी होने पर नजर आने वाले लक्षणों के बारे में बताते हुए।

आजकल रीढ़ की हड्डी की समस्याएं बढ़ रही हैं। इसका मुख्य कारण है अनियमित जीवनशैली। आजकल ज्यादा समय तक लोग एक ही जगह पर बैठकर काम करते हैं। उनके फिजिकल एक्टिविटी में कमी आ गयी है। इसके कारण व्यक्ति का वजन बढ़ रहा है, जिसका दबाव रीढ़ की हड्डी पर पड़ता है। इसके अलावा रीढ़ की हड्डी को पोषण उसकी गतिविधियों से ही मिलता है। फिजिकल एक्टिविटी में कमी के कारण रीढ़ की हड्डी को उचित मात्रा में पोषण नहीं मिल पाता, जिससे भी व्यक्ति की समस्याएं बढ़ जाती हैं। आजकल बच्चे भी ज्यादातर समय पढ़ाई-लिखाई में व्यस्त रहते हैं और खेलकूद में ज्यादा समय नहीं दे पाते। इसीलिए कम उम्र से ही रीढ़ की हड्डी की समस्याएं बढ़ रही हैं। डॉ. जन्मेजय जामदार, न्यूरोसर्जन, रीढ़ की हड्डी की समस्याएं बढ़ने के कारणों के बारे में बताते हुए।

रीढ़ की हड्डी की समस्याओं से बचना है तो अपने वजन को नियंत्रित करें। किसी भी एक मुद्रा में ज्यादा देर तक काम न करें। हमेशा चलते-फिरते रहें। जो लोग कंप्यूटर में काम करते हैं उन्हें बीच-बीच में कुछ एक्सरसाइज जरूर करना चाहिये। कमर का व्यायाम करना भी जरूरी है। इसके साथ ही योगा की मदद से भी रीढ़ की हड्डी की समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है। डॉ. जन्मेजय जामदार, न्यूरोसर्जन, रीढ़ की हड्डी की समस्याओं से बचाव के बारे में बताते हुए।

ब्रेन स्ट्रोक 2 प्रकार का होता है। अगर मस्तिष्क के किसी हिस्से में खून की कमी हो जाती है, तो वो हिस्सा डैमेज हो जाता है। ऐसे में व्यक्ति को ब्रेन स्ट्रोक होने की आशंका बनी रहती है। वहीं कई बार खून की धमनी फट जाने से भी खून का रिसाव शुरू हो जाता है और उसके आसपास का हिस्सा डैमेज हो जाता है। इससे भी व्यक्ति को ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है। इस तरह ब्रेन स्ट्रोक के 2 प्रकार होते हैं और इसी के आधार पर मरीजों में लक्षण नजर आते हैं। डॉ. जन्मेजय जामदार, न्यूरोसर्जन, ब्रेन स्ट्रोक के प्रकार के बारे में बताते हुए।

ब्रेन स्ट्रोक से बचाव के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं। अगर किसी को शुगर, बीपी या थाइरॉइड की शिकायत है तो उसे कंट्रोल करें। इससे ब्रेन स्ट्रोक की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है। हर रोज ब्रिस्क वॉक करें और पोषण युक्त खाने का सेवन करें। आजकल लोग बाहर का खाना ज्यादा पसंद करते हैं। इस खाने में चर्बी, शुगर व हानिकारक तत्व मौजूद होते हैं जो व्यक्ति को नुकसान पहुँचा सकते हैं। इसीलिए बाहर के खाने से परहेज करें। इसके साथ ही धूम्रपान और शराब का सेवन भी ना करें। डॉ. जन्मेजय जामदार, न्यूरोसर्जन, ब्रेन स्ट्रोक से बचाव के लिए जीवनशैली में कुछ आवश्यक बदलाव करने की सलाह देते हुए।
Doctor's explanation and communication is very good. He is too polite by nature. I'm happy with his treatment.
डॉ जनमेजय न केवल बेहतरीन एंडोस्कोपिक न्यूरो सर्जन हैं अपितु वे डॉ जामदार परिवार के तीसरी पीढ़ी के संस्कारवान, युवा,दक्ष व मानवीय संवेदनाओं से ओतप्रोत चिकित्सक भी है, ये गुण उन्हें विरासत में मिले हैं। मुझे विश्वास है कि वे संस्कारधानी जबलपुर से न्यूरो सर्जरी के मरीजो के नागपुर अथवा बाहर हो रहे पलायन को रोकने में अपनी योग्यता और बेहतर सेवाओं के दम पर सफल होंगे।
I was unable to walk because of a knee infection. They treated me well, and today I can not only walk but also run.

Dr. Janmejay Jamdar, Neurosurgeon.
Advance Neurosurgeon & Spine Surgery Specialist
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Dr. Jamdar has served as Senior Resident in Neurosurgery at Sanjay Gandhi Post Graduate Institute of Medical Sciences from 2013 to 2016. He worked as Resident General Surgeon at Netaji Subhash Chandra Bose Medical College and Hospital from 2009 to 2012. He has also practiced as Consultant Neurosurgeon at Jamdar Hospital Pvt. Ltd. and Jabalpur Hospital and Research Centre.
Dr. Jamdar focuses on appropriate diagnosis and condition-based management, offering treatment options suited to the patient’s clinical needs.
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डॉ. जन्मेजय जामदार, न्यूरोसर्जन, ब्रेन स्ट्रोक के लक्षणों के बारे में जानकारी देते हुए।

रीढ़ की हड्डी के जिस हिस्से में परेशानी होती है, उसी के अनुसार व्यक्ति में लक्षण नजर आते हैं। अगर व्यक्ति के गर्दन में कोई समस्या होती है तो उसे हाथ, गर्दन एवं सिर के पिछले हिस्से में दर्द का एहसास हो सकता है। रीढ़ की हड्डी में दबाव पड़ने से पैर लड़खड़ा सकते हैं या व्यक्ति को चलने में तकलीफ हो सकती है। वहीं अगर पीठ में कोई समस्या आ जाये, तो इसका असर पसलियों पर पड़ता है। अगर कोई नस दब जाये तो व्यक्ति को चलने में परेशानी होने लगती है। यदि, कमर में कोई परेशानी उत्पन्न हो जाये तो पैरों में झुनझुनाहट एवं सुन्नपन जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं। इसके साथ ही व्यक्ति के मल और पेशाब में भी तकलीफ बढ़ जाती है। डॉ. जन्मेजय जामदार, न्यूरोसर्जन, रीढ़ की हड्डी में परेशानी होने पर नजर आने वाले लक्षणों के बारे में बताते हुए।

आजकल रीढ़ की हड्डी की समस्याएं बढ़ रही हैं। इसका मुख्य कारण है अनियमित जीवनशैली। आजकल ज्यादा समय तक लोग एक ही जगह पर बैठकर काम करते हैं। उनके फिजिकल एक्टिविटी में कमी आ गयी है। इसके कारण व्यक्ति का वजन बढ़ रहा है, जिसका दबाव रीढ़ की हड्डी पर पड़ता है। इसके अलावा रीढ़ की हड्डी को पोषण उसकी गतिविधियों से ही मिलता है। फिजिकल एक्टिविटी में कमी के कारण रीढ़ की हड्डी को उचित मात्रा में पोषण नहीं मिल पाता, जिससे भी व्यक्ति की समस्याएं बढ़ जाती हैं। आजकल बच्चे भी ज्यादातर समय पढ़ाई-लिखाई में व्यस्त रहते हैं और खेलकूद में ज्यादा समय नहीं दे पाते। इसीलिए कम उम्र से ही रीढ़ की हड्डी की समस्याएं बढ़ रही हैं। डॉ. जन्मेजय जामदार, न्यूरोसर्जन, रीढ़ की हड्डी की समस्याएं बढ़ने के कारणों के बारे में बताते हुए।

रीढ़ की हड्डी की समस्याओं से बचना है तो अपने वजन को नियंत्रित करें। किसी भी एक मुद्रा में ज्यादा देर तक काम न करें। हमेशा चलते-फिरते रहें। जो लोग कंप्यूटर में काम करते हैं उन्हें बीच-बीच में कुछ एक्सरसाइज जरूर करना चाहिये। कमर का व्यायाम करना भी जरूरी है। इसके साथ ही योगा की मदद से भी रीढ़ की हड्डी की समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है। डॉ. जन्मेजय जामदार, न्यूरोसर्जन, रीढ़ की हड्डी की समस्याओं से बचाव के बारे में बताते हुए।

ब्रेन स्ट्रोक 2 प्रकार का होता है। अगर मस्तिष्क के किसी हिस्से में खून की कमी हो जाती है, तो वो हिस्सा डैमेज हो जाता है। ऐसे में व्यक्ति को ब्रेन स्ट्रोक होने की आशंका बनी रहती है। वहीं कई बार खून की धमनी फट जाने से भी खून का रिसाव शुरू हो जाता है और उसके आसपास का हिस्सा डैमेज हो जाता है। इससे भी व्यक्ति को ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है। इस तरह ब्रेन स्ट्रोक के 2 प्रकार होते हैं और इसी के आधार पर मरीजों में लक्षण नजर आते हैं। डॉ. जन्मेजय जामदार, न्यूरोसर्जन, ब्रेन स्ट्रोक के प्रकार के बारे में बताते हुए।

ब्रेन स्ट्रोक से बचाव के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं। अगर किसी को शुगर, बीपी या थाइरॉइड की शिकायत है तो उसे कंट्रोल करें। इससे ब्रेन स्ट्रोक की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है। हर रोज ब्रिस्क वॉक करें और पोषण युक्त खाने का सेवन करें। आजकल लोग बाहर का खाना ज्यादा पसंद करते हैं। इस खाने में चर्बी, शुगर व हानिकारक तत्व मौजूद होते हैं जो व्यक्ति को नुकसान पहुँचा सकते हैं। इसीलिए बाहर के खाने से परहेज करें। इसके साथ ही धूम्रपान और शराब का सेवन भी ना करें। डॉ. जन्मेजय जामदार, न्यूरोसर्जन, ब्रेन स्ट्रोक से बचाव के लिए जीवनशैली में कुछ आवश्यक बदलाव करने की सलाह देते हुए।
Doctor's explanation and communication is very good. He is too polite by nature. I'm happy with his treatment.
डॉ जनमेजय न केवल बेहतरीन एंडोस्कोपिक न्यूरो सर्जन हैं अपितु वे डॉ जामदार परिवार के तीसरी पीढ़ी के संस्कारवान, युवा,दक्ष व मानवीय संवेदनाओं से ओतप्रोत चिकित्सक भी है, ये गुण उन्हें विरासत में मिले हैं। मुझे विश्वास है कि वे संस्कारधानी जबलपुर से न्यूरो सर्जरी के मरीजो के नागपुर अथवा बाहर हो रहे पलायन को रोकने में अपनी योग्यता और बेहतर सेवाओं के दम पर सफल होंगे।
I was unable to walk because of a knee infection. They treated me well, and today I can not only walk but also run.